अंग्रेजी साहित्य में नोबेल जीतने वाले पहले व्यक्ति थे जंगल बुक के लेखक

अंग्रेजी साहित्य में नोबेल जीतने वाले पहले व्यक्ति थे जंगल बुक के लेखक

रूडयार्ड किपलिंग : जन्म: 30 दिसंबर 1865 | मृत्यु : 18 जनवरी 1936

शिक्षा …किपलिंग ने यूनाइटेड सर्विसेज कॉलेज सें पढ़ाई की, जहां उनका झुकाव साहित्य और लेखन की ओर बढ़ा। उनके पास कोई फॉर्मल डिग्री नहीं थी, लेकिन लाहौर में जर्नलिज्म से करियर शुरू किया।

रुडयार्ड किपलिंग मुंबई में जन्मे, कम उम्र से ही उन्होंने साम्राज्यवाद की प्रशंसा करने वाली कविताएं लिखीं तथा अपने समय के कई लेखकों को प्रभावित किया ।

योगदान… किपलिंग ने द जंगल बुक और द सेकंड जंगल बुक लिखी। उन्होंने भारतीय जीवन और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें 1907 में नोबेल पुरस्कार भी मिला।

कहानियों में दिलचस्पी…रुडयार्ड किपलिंग बॉम्बे के मालाबार हिल में पले-बढ़े। उनके पिता जॉन लॉकवुड किपलिंग एक मूर्तिकार और आर्ट स्कूल में प्रिंसिपल थे। परिवार ने साहित्य और कला को महत्व दिया। छोटी उम्र से ही वे कहानियां सुनाते थे। 5 साल की उम्र में इंग्लैंड भेजा गया, जहां एक क्रूर बोर्डिंग हाउस में रहे, जिसे उन्होंने ‘हाउस ऑफ डेसोलेशन’ कहा। लेकिन 16 साल की उम्र में भारत लौटकर पत्रकारिता शुरू की । युवा अवस्था में उन्होंने मार्क ट्वेन से मुलाकात की। यही अनुभव आगे जंगल बुक की नींव बने ।

जंगल बुक ने स्काउटिंग परंपरा शुरूआत की

किपलिंग की जंगल बुक पढ़कर स्काउटिंग के संस्थापक रॉबर्ट बैडेन पॉवेल इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बच्चों के लिए वुल्फ कन्स (कब स्काउट्स) प्रोग्राम शुरू किया। उन्होंने किपलिंग से परमिशन ली और किताब के पात्रों बल्लु, बघीरा को लीडरशिप और टीमवर्क सिखाने के लिए इस्तेमाल किया। आज भी दुनिया भर के कब स्काउट्स में ग्रैंड हाउल और जंगल के नियम जीवित हैं।

पंचतंत्र और जातक कथाओं या जंगलबुक का विचार

जंगल बुक का आइडिया रूडयार्ड किपलिंग को पंचतंत्र कहानियों और जातक कथाओं से मिला, जहां जानवर बोलते हैं और नैतिक बातें सिखाते हैं। जैसे रिक्की- टिक्की टवी की कहानी पंचतंत्र से ली गई। किप्लिंग बुक में जंगल मध्यप्रदेश के सिवनी में स्थित जंगलों पर आधारित है। उन्होंने कभी सिवनी का जंगल नहीं देखा, लेकिन रॉबर्ट स्टर्नडेल की किताब सिवनी: कैंप लाइफ ऑन द सतपुड़ा रेंज (1877) ने उन्हें जंगल बुक के लिए काफी मदद की।

किपलिंग का नाम रुडयार्ड झील से लिया गया

किपलिंग का पूरा नाम जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग था । उनके माता-पिता जॉन लॉकवुड और एलिस की मुलाकात 1863 में स्टैफोर्डशायर की रुडयार्ड झील के किनारे हुई थी, जहां वे घूमने आए थे। झील की सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने पहले बच्चे का नाम रुडयार्ड रखा, जो उस जगह की याद बन गया। बाद में यह नाम उनके साथ इतनी मजबूती से जुड़ गया कि दुनिया उन्हें रुडयार्ड किपलिंग के नाम से जानती है।
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