प्लाज्मा वेपन: बिना धमाकों से पिघलाने वाली तकनीक

पिछले दिनों ईरान एक बार फिर आंतरिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव को लेकर सुर्खियों में रहा। इससे पहले अमेरिका की ओर से यह दावा सामने आया कि ईरान प्लाज्मा वेपन जैसी उन्नत सैन्य तकनीक पर काम कर रहा है। पेंटागन के हवाले से आई इस खबरसने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी। दावा यह है कि प्लाजमा वेपन युद्ध की तस्वीर हमेशा के लिए बदलने वाली तकनीक हो सकती है। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं हुए हैं। क्या होते हैं प्लाज्मा वेपन और ये कितने घातक हो सकते हैं?

प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था है। ठोस, द्रव और गैस के बाद यह अवस्था तब बनती है जब गैस को बेहद ज्यादा गर्म किया जाए। इसमें परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन खो देते हैं और आयन व मुक्त इलेक्ट्रॉन का मिश्रण बन जाता है। यही वजह है कि प्लाज्मा बिजली और चुंबकीय क्षेत्रों के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। प्लाज्मा ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला पदार्थ है। तारे, सूरज, आकाशगंगाएं, बिजली की चमक और ऑरोरा इसी के उदाहरण हैं। धरती पर इसका इस्तेमाल पहले से ही कई जगह हो रहा है, जैसे नियॉन लाइट, फ्लोरोसेंट लैंप, प्लाज्मा कटिंग, वेल्डिंग, मेडिकल स्टरलाइजेशन और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन ।

इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निष्क्रिय कर सकते हैं

साइंस फिक्शन फिल्मों और वीडियो गेम्स में यह तकनीक अभी प्रयोगशालाओं प्लाज्मा गन या प्लाज्मा बीम आम बात है, लेकिन यह तकनीक अभी प्रयोगशालाओं तक ही सीमित है।

प्लाज्मा बेहद अस्थिर होता है। यह हवा में तेजी से फैल जाता है और इसे लंबे समय तक नियंत्रित रखना बहुत मुश्किल है। इसके लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है। यही वजह है कि हैंडहेल्ड या मोबाइल प्लाज्मा हथियार फिलहाल अव्यावहारिक माने जाते हैं। अमेरिका, रूस और चीन जैसे तकनीकी रूप से बेहद उन्नत देश दशकों से निर्देशित ऊर्जा हथियारों पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई भी देश ऑपरेशनल प्लाज्मा वेपन विकसित नहीं कर सका है। खुद अमेरिका की डार्पा एजेंसी का मैरॉडर प्रोजेक्ट सालों से शोध के स्तर पर ही है।

ऊर्जा हथियार माने जाते हैं, जो आयनाइज्ड गैस की बीम या धार से लक्ष्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सैद्धांतिक तौर पर ये हथियार तेज गर्मी, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभाव और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक प्लाज्मा हथियार तीन तरह के हो सकते हैं। पहला प्लाज्मा प्रोजेक्टाइल, दूसरा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठप करने वाले डिसरप्टिव फील्ड हथियार और तीसरा अत्यधिक ताप से चीजों को पिघलाने वाले थर्मल हथियार।

ईरान का दावा और हकीकत रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान का एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन पिछले पांच साल से प्लाज्मा तकनीक पर काम कर रहा है। हालांकि ईरान ने कभी भी आधिकारिक तौर पर प्लाज्मा हथियार विकसित करने की पुष्टि नहीं की है। पिछले साल ईरान ने प्लाज्मा तकनीक के एक नागरिक उपयोग की जानकारी जरूर दी थी। रफसांजन में ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग और डिकंटैमिनेशन के लिए प्लाज्मा आधारित प्लांट शुरू किया गया। हालांकि सैन्य इस्तेमाल से कोई लेना-देना नहीं था। ईरान में मालेक अश्तर यूनिवर्सिटी और ईरानियन स्पेस रिसर्च सेंटर जैसे संस्थान प्लाज्मा फिजिक्स पर काम करते हैं, लेकिन उनके शोध को सीधे हथियारों से जोड़ने के सबूत सामने नहीं आए हैं।
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