सीबीएसई का नया सेक्शन रूल : अगर सही जवाब भी गलत जगह लिखा तो मिलेगा जीरो
सीबीएसई का नया सेक्शन रूल : अगर सही जवाब भी गलत जगह लिखा तो मिलेगा जीरो
नियमों में बदलाव • बोर्ड परीक्षा में साइंस और सोशल साइंस के पेपर में रखना होगी सावधानी
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका लिखने के नियमों में बदलाव किया है। अब परीक्षार्थी अपनी मर्जी से कहीं भी किसी भी सवाल का जवाब नहीं लिख सकेंगे। विज्ञान के पेपर में अगर फिजिक्स का उत्तर केमिस्ट्री के लिए तय सेक्शन में लिख दिया तो वह उत्तर सही होने के बावजूद जांचा नहीं जाएगा और इसके जीरो अंक मिलेंगे। हाई स्कूल और हायर सेकंडरी की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होने वाली है। इंदौर के ही 20 स्कूलों के करीब 20 हजार बच्चे इन परीक्षाओं में शामिल होंगे। बोर्ड ने मूल्यांकन.प्रक्रिया को डिजिटल और सटीक बनाने के
लिए बोर्ड ने 10वीं कक्षा के दो मुख्य विषयों विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार विज्ञान की उत्तर पुस्तिका को तीन स्पष्ट भागों में बांटना होगा। पहले सेक्शन ए में बायोलॉजी, बी में केमिस्ट्री और सी में फिजिक्स होगा। इसी तरह सामाजिक विज्ञान को चार भाग (इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र) में बांटा गया है। विद्यार्थियों को एक साथ एक सेक्शन पूरा ही हल करना होगा।

कॉपियों की डिजिटल चेकिंग की ओर अग्रसर
शिक्षाविदों के अनुसार, सीबीएसई अब कॉपियों की डिजिटल चेकिंग (ऑन स्क्रीन मार्किंग) की ओर बढ़
रहा है। अक्सर छात्र अलग-अलग विषयों के उत्तर आपस में मिला देते थे, जिससे मूल्यांकन में देरी और
गलतियां होती थीं। अब हर विषय का विशेषज्ञ केवल अपने सेक्शन की जांच करेगा। यदि उत्तर गलत सेक्शन में है तो वह सॉफ्टवेयर या परीक्षक की स्क्रीन पर दिखाई ही नहीं देगा। हायर सेकंडरी के छात्रों को भी यह सलाह दी गई है कि वे सेक्शन के क्रम को न बिगाड़ें, नहीं तो डिजिटल चेकिंग में कोई तकनीकी समस्या न आए।
सेक्शन में आगे-पीछे लिख सकेंगे जवाब
सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि पहले सवाल के बाद दूसरा सवाल ही करना है। शिक्षाविद डॉ. संजय मिश्रा बताते हैं, छात्र किसी एक सेक्शन के भीतर प्रश्नों के जवाब अपनी सुविधा से पहले या बाद में दे सकते हैं। लेकिन किसी एक सेक्शन के बीच दूसरे सेक्शन का कोई भी जवाब नहीं लिख सकेंगे। प्राचार्यों का कहना है कि 15 मिनट के रीडिंग टाइम का महत्व अब और बढ़ गया है। छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे उत्तर पुस्तिका मिलते ही पहले पेज प्लानिंग करें।
री-इवैल्यूएशन में भी नहीं मिलेगी राहत
सीबीएसई के नए डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम के तहत गलत सेक्शन में लिखे गए उत्तरों पर इवैल्यूएशन या वेरिफिकेशन के दौरान कोई विचार नहीं किया जाएगा। बोर्ड का तर्क है कि जब उत्तर सही मैपिंग या निर्धारित स्थान पर नहीं होता तो वह परीक्षक की स्क्रीन पर प्रदर्शित ही नहीं होता। वेरिफिकेशन प्रक्रिया में केवल अंकों की गणना होती है। इसलिए गलत स्थान पर लिखे उत्तर को सिस्टम इनवैलिड मानेगा। इससे उन अंकों को कुल योग में नहीं जोड़ा जा सकता। पुनर्मूल्यांकन के समय भी इसे निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा, न कि चेकिंग की गलती ।
प्रैक्टिकल पर भी डिजिटल पहरा
ग्रुप फोटो के साथ ही अपलोड हो रहे अंक बोर्ड ने थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए भी रियल टाइम मॉनिटरिंग की है। हर स्कूल को प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान छात्रों के साथ इंटर्नल और क् एग्जामिनर का एक जियो-टैग्ड ग्रुप फोटो अनिवार्य किया है। इस फोटो के बगैर स्कूलों के प्रैक्टिकल अंक पोर्टल पर अपलोड नहीं होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य डमी छात्रों पर रोक लगाना है। फोटो अपलोड करते समय मोबाइल की लोकेशन (लैटिट्यूड और लॉन्गिट्यूड) और समय मैच किया जाता है।
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