होर्मुज से तय होता वैश्विक अर्थव्यवस्था का भविष्य !
विश्व के नक्शे पर एक छोटा सा समुद्री रास्ता है, लेकिन इसकी अहमियत इतनी है कि पूरी दुनिया की निगाहें हमेशा इसी पर टिकी रहती हैं। इसे ‘होर्मुज की खाड़ी’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) कहा जाता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य केवल पानी का एक गलियारा भर नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की वह रक्त धमनी भी है, जिसके बंद होते ही दुनिया की अर्थव्यवस्था ‘कार्डियक अरेस्ट’ का शिकार हो सकती है। जब भी होर्मुज में तनाव बढ़ता है, तो वह केवल मध्य-पूर्व का मुद्दा नहीं होता, बल्कि भारत के पेट्रोल पंपों से लेकर वॉशिंगटन के शेयर बाजार तक की हलचल का कारण बन जाता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी लड़ाई के बीच अगर ईरान होमुंज स्ट्रेट में ऑयल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लगा दे तो भारत समेत पूरी दुनिया की ऑयल सप्लाई ठप पड़ सकती है।
होर्मुज की खाड़ी कैसी है?
होर्मुज की खाड़ी एक संकरी समुद्री पट्टी है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ती है। इसका सबसे संकरा हिस्सा मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। हालांकि जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए जो दो शिपिंग लेन तय की गई हैं, वे इससे भी काफी संकरी हैं। वे लगभग 3-3 किलोमीटर चौड़ी हैं। सामरिक रूप से इसके उत्तर ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात हैं। ईरान का इस पर भौगोलिक प्रभाव इतना अधिक है कि वह जब चाहे इस रास्ते को नियंत्रित करने की धमकी दे सकता है, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रमुख केंद्र बना रहता है।
दुनिया के लिए इतनी अहम क्यों ?
होर्मुज की खाड़ी को ‘ऊर्जा का महामार्ग’ कहा जाता है।।दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा।इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक,हकुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों काहलगभग सारा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से एशिया और पश्चिमी देशों तक पहुंचती है। इसे वैश्विक ऊर्जा का ‘एटीएम’ कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां से गुजरने वाले तेल का परिवहन न केवल सस्ता पड़ता है, बल्कि इसकी मात्रा इतनी अधिक है कि दुनिया का कोई भी अन्य.मार्ग इसकी भरपाई करने में सक्षम नहीं है।
कितने का होता है कारोबार ?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और पेटोलियम उत्पाद इस जलमार्ग।से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं।।यह वैश्विक खपत का लगभग 20 से 25 फीसदी है। अगर इसके आर्थिक मूल्य का अनुमान लगाया जाए तो।यह रोजाना अरबों डॉलर के व्यापार के बराबर बैठता है। एशिया के कई बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश, जैसे चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया मध्य पूर्व से आने वाले तेल और गैस के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं। इसलिए इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार की अस्थिरता सीधे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है।
अगर यह बंद हो जाए तो?
होर्मुज का बंद होना आधुनिक सभ्यता के लिए एक ‘डार्क एज’ (अंधकार युग) जैसा होगा। जैसे ही यह खबर फैलेगी कि होर्मुज बंद है, तेल की कीमतें रातों- रात दोगुनी या तीन गुनी हो सकती हैं और दुनिया भर में ईंधन की भारी कमी हो जाएगी। तेल की कीमतें बढ़ने।से परिवहन महंगा होगा, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर औद्योगिक कच्चे माल तक सब कुछ महंगा हो।जाएगा जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को चरमरा देगा। इसके अलावा, इस खाड़ी को बंद करना जियो पॉलिटिक्स में ‘युद्ध की घोषणा’ माना जाता है। इससे ईरान-इजइरालहके मौजूदा संघर्ष में और विस्तार हो सकता है, जिससे वैश्विक सैन्य संघर्ष का खतरा पैदा हो जाएगा।
इसमें ईरान की क्या भूमिका ?
ईरान अक्सर पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने पर इसहखाड़ी को बंद करने की धमकी देता है, जैसा कि उसने।मौजूदा संघर्ष के दौरान दी है। ईरान छोटे ड्रोन, मिसाइलोंहऔर समुद्री माइन्स का उपयोग करके बड़े जहाजों के लिए इस रास्ते को असुरक्षित बना सकता है। यही कारण है कि अमेरिका ने बहरीन में अपना ‘फिफ्थ फ्लीट’ मुख्यालय बनाया हुआ है। अमेरिका की रक्षा नीति का एक बड़ा हिस्सा इस खाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है, ताकि तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
क्या इसका कोई विकल्प है?
दुनिया होर्मुज की खाड़ी पर निर्भरता कम करने के प्रयास कर रही है। सऊदी अरब और यूएई ने तेल पाइपलाइनें बनाई हैं जो होर्मुज को पार किए बिना तेल को लाल सागर तक ले जाती हैं, लेकिन ये पाइपलाइनें इतनी बड़ी नहीं हैं कि पूरे होर्मुज के ट्रैफिक को संभाल सकें।हालांकि कुछ देशों ने वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग विकसित किए हैं, जिनसे तेल को सीधे बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सके। उदाहरण के लिए सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात ने ऐसी पाइपलाइनें बनाई हैं जो खाड़ी के बाहर के बंदरगाहों तक तेल पहुंचा सकती हैं। फिर भी इन मार्गों की क्षमता सीमित है और वे पूरी तरह से होर्मुज के विकल्प नहीं बन सकते। ■■■■