क्रिस्टियान ह्यूजेंस, जिनकी बदौलत दुनिया को मिली पेंडुलम वाली घड़ी
क्रिस्टियान ह्यूजेंस, जिनकी बदौलत दुनिया को मिली पेंडुलम वाली घड़ी
क्रिस्टियान ह्यूजेंस को नीदरलैंड्स का महानतम वैज्ञानिक माना जाता है। वे खास तौर पर पेंडुलम के आविष्कार के लिए जाने जाते हैं। इसने समय मापने की सटीकता को कई गुना बढ़ाया। उन्होंने अंतरिक्ष की संरचना और प्रकृति के नियमों को गणित के जरिए समझाने में अहम भूमिका निभाई। शनि ग्रह की रिंग्स की व्याख्या और उसके सबसे बड़े उपग्रह टाइटन की खोज भी उन्हीं की देन है।
शिक्षा योगदान
ह्यूजेंस की शुरुआती शिक्षा घर पर निजी शिक्षकों के साथ हुई, जहां उन्होंने ज्योमेट्री, संगीत और मैकेनिकल मॉडल्स बनाना सीखा। उनके पिता एक प्रभावशाली डिप्लोमैट थे। इस वजह से वे उस समय के बड़े वैज्ञानिकों से मिलकर उनसे काफी कुछ सीख पाते थे। क्रिस्टियान ने लीडेन यूनिवर्सिटी से कानून और गणित की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने ब्रेडा के कॉलेज ऑफ ऑरेंज से भी शिक्षा हासिल की।

ह्यूजेंस ने गणित और विज्ञान से।जुड़े अनेकों विषयों पर शोध किया। महज 27 साल की आयु में पेंडुलम घड़ी का आविष्कार करने के अलावा उन्होंने खुद के बनाए खास टेलिस्कोप की मदद से टाइटन की खोज की। साथ ही वेव थ्योरी के माध्यम से उन्होंने बताया कि प्रकाश तरंगों की तरह फैलता है।
उन्होंने गणित में संभावना (प्रोबैबिलिटी) और भौतिकी में फोर्स और मोमेंटम के जरूरी।सिद्धांत भी विकसित किए।
लंदन-पेरिस के वैज्ञानिकों से जुड़े नीदरलैंड्स में जन्म ह्यूजेंस ने कम उम्र में ही अपनी लगन और पिता के रुतबे की बदौलत, पेरिस और लंदन की वैज्ञानिक सभाओं में जाना शुरू कर दिया। इन दोनों शहरों में उनकी ख्याति एक ऐसे युवा वैज्ञानिक के रूप में फैली, जो प्रकृति और अंतरिक्ष के रहस्यों से पर्दा उठाना चाहता है। कई वैज्ञानिकों ने उनकी खोज को चुनौती भी दी, लेकिन उन्होंने लैब एक्सपेरिमेंट्स के जरिए अपने सिद्धांतों को सही साबित किया।
1659 – में सिस्टेमा सेटनियम के जरिए शनि ग्रह की रिंग्स की व्याख्या दी, जिससे स्पष्ट हुआ कि शनि के चारों ओर पतली परतों वाली रिंग्स मौजूद हैं। पेंडुलम से समुद्री यात्राएं सुरक्षित हुई ह्यूजेंस का पेंडुलम घड़ी बनाने का असली उद्देश्य समुद्र में जहाजों की सही स्थिति, यानी लॉन्गिट्यूड का पता लगाना था, ताकि लंबी समुद्री यात्राएं ज्यादा सुरक्षित और सटीक बन सकें। उस दौर में दिशा और दूरी का सही अनुमान लगाना नाविकों के लिए बड़ी चुनौती था, जिसे यह आविष्कार आसान बनाता था ।
ह्यूजेस सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं थे, वे संगीत में भी सुधार चाहते थे। उन्होंने 31 टोन सिस्टम विकसित किया।
इसमें एक सप्तक को 12 के बजाय 31 हिस्सों में बांटा गया।
गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को चुनौती दी एलियंस पर रिसर्च करना चाहते थे 1689 में अपनी इंग्लैंड यात्रा के दौरान ह्यूजेंस की मुलाकात मशहूर वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन से हुई। उन्होंने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत पर सवाल उठाए। वे कहते थे कि दो चीजें दूर रहकर एक-दूसरे को कैसे खींच सकती हैं, जब उनके बीच कुछ दिखाई भी नहीं देता। इसी तरह उन्होंने न्यूटन के प्रकाश के सिद्धांत को भी चुनौती दी और अपनी बनाई वेव थ्योरी को बेहतर बताया, जो बाद में सही भी साबित हुई।
ह्यूजेंस को अपने पूरे जीवनकाल में कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा। वे अपने आखिरी सालों में एलियंस की संभावना पर भी शोध करना चाहते थे। इस पर उन्होंने ‘कॉस्मोथियोरोस’ नाम की एक किताब भी लिखी थी। लेकिन 1695 में 66 साल की उम्र में उनका गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया। इसके 3 साल बाद किताब को प्रकाशित किया गया।
1657 में ह्यूजेंस द्वारा पेटेंट कराई गई पेंडुलम घड़ी का डिजाइन, जिसने समय मापन को पहले से कहीं अधिक सटीक और स्पष्ट हो गया।
1655 में शनि ग्रह का उपग्रह टाइटन खोजा
ह्यूजेंस ने 1655 में टाइटन की खोज अपने बनाए टेलीस्कोप से की। उन्होंने कई रातों तक इसकी गति का अध्ययन कर साबित किया कि यह शनि का उपग्रह है। उन्होंने शनि के छल्लों की संरचना भी समझाई। करीब 350 साल बाद 2005 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी का ‘ह्यूजेंस प्रोब’ टाइटन पर उतरा। इसका नाम क्रिस्टियान के सम्मान में रखा गया था। खगोल विज्ञान में आज भी
यह खोज काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
27 की उम्र में पेंडुलम घड़ी का आविष्कार किया। 1663 -31 स्वरों की अनोखी संगीत प्रणाली का
विचार दिया। में रॉयल के सदस्य बने ।
क्रिस्टियान ह्यूजेंस
जन्म – 14 अप्रैल, 1629 | मृत्यु – 8 जुलाई, 1695
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