वैक्सीन के जनक जेनर, जिनकी खोज से संभव हुआ चेचक का अंत

एडवर्ड जेनर 18वीं शताब्दी के ब्रिटिश चिकित्सक और वैज्ञानिक थे। उन्होंने दुनिया का पहला टीका विकसित कर चेचक जैसी घातक बीमारी का अंत किया। उस समय चेचक हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती थी। जेनर की खोज ने न केवल चेचक को जड़ से मिटाने का आधार तैयार किया, बल्कि आधुनिक टीकाकरण और इम्यूनोलॉजी की नींव रखी।

शिक्षा- जेनर ने 14 साल की उम्र में एक सर्जन के पास सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में लंदन के प्रसिद्ध सर्जन जॉन हंटर के मार्गदर्शन में उन्होंने एनाटॉमी और विज्ञान की बारीकियों को समझा। जेनर न केवल एक डॉक्टर थे, बल्कि उन्हें प्रकृति, संगीत और कविता से भी गहरा लगाव था।

एडवर्ड जेनर का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने चिकित्सा जगत को ‘टीकाकरण’ जैसा हथियार दिया। इससे मानवता को बीमारियों से लड़ने की नई दिशा मिली। उन्होंने यह वैज्ञानिक आधार प्रदान किया कि यदि शरीर को किसी कमजोर वायरस के संपर्क में लाया जाए, तो वह भविष्य के बड़े खतरों के खिलाफ सुरक्षा चक्र तैयार कर लेता है। 1796 में काउपॉक्स वाला प्रयोग किया, जो चेचक से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

एडवर्ड जेनर का जन्म इंग्लैंड के बर्कले में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा में रुचि के चलते सर्जन के पास प्रशिक्षण लेना शुरू किया। प्रशिक्षण के दौरान जेनर ने एक ग्वाले को यह कहते सुना कि उसे कभी चेचक नहीं होगा, क्योंकि उसे पहले ही काउपॉक्स हो चुका है। काउपॉक्स गायों में होने वाला एक हल्का संक्रमण था। उस समय बड़े डॉक्टर इस बात को ग्रामीण अंधविश्वास मानकर नजर अंदाज कर देते थे, लेकिन जेनर ने इसे गंभीरता से लिया।उन्होंने वर्षों तक इस रहस्य पर अध्ययन किया कि आखिर काउपॉक्स और चेचक के बीच क्या संबंध है।

डॉ. जेनर्स हाउस, म्यूजियम एंड गार्डन में मौजूद टेम्पल ऑफ वैक्सीन को दुनिया की पहली वैक्सीनेशन क्लिनिक मानी जाती है। इसी जगह 1796 में जेनर ने 8 वर्षीय जेम्स फिप्स को चेचक के खिलाफ दुनिया का पहला टीका लगाया था। जेनर ने बाद में यहां आम लोगों को भी मुफ्त में वैक्सीनेशन देना शुरू किया।

सालों की रिसर्च के बाद 1796 को एडवर्ड जेनर ने एक ऐतिहासिक प्रयोग किया। उन्होंने एक ग्वालिन के हाथ से ‘काउपॉक्स’ का संक्रमण लेकर 8 साल के बच्चे जेम्स फिप्स को दिया। कुछ दिनों बाद जब बच्चे को खतरनाक चेचक के संपर्क में लाया गया, तो वह बीमार नहीं पड़ा। इस प्रयोग ने पहली बार साबित किया कि हल्का संक्रमण शरीर को बड़ी बीमारी से लड़ने के लिए तैयार कर सकता है। यही खोज आगे चलकर वैक्सीन की नींव बनी और चिकित्सा जगत में नई क्रांति की शुरुआत हुई।

जेनर ने 1798 में अपने शोध को ‘एन इंक्वायरी इनटू द कॉजेज एंड इफेक्ट्स ऑफ द वैरियल वैक्सीन’ नामक पुस्तक में प्रकाशित किया। शुरुआत में कई लोगों ने उनका विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी खोज पूरी दुनिया में स्वीकार की जाने लगी। जेनर की खोज के कारण ही आगे चलकर पोलियो, खसरा और अन्य कई बीमारियों के टीके विकसित किए जा सके। आखिरकार 1980 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने आधिकारिक तौर पर दुनिया को चेचक मुक्त घोषित किया।

जेनर केवल चिकित्सा विज्ञान तक सीमित नहीं थे। उन्हें प्रकृति, संगीत और कविता से भी गहरा लगाव था। उन्होंने पक्षियों पर भी अध्ययन किया और सबसे पहले यह वैज्ञानिक रूप से बताया कि कोयल अपने अंडे दूसरे पक्षियों के घोंसले में देकर उनके अंडों को बाहर गिरा देती है। इस शोध के कारण उन्हें 1788 में प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी का सदस्य चुना गया। 26 जनवरी 1823 को 73 वर्ष की आयु में स्ट्रोक के कारण एडवर्ड जेनर का निधन हो गया।

एडवर्ड जेनर : जन्म: 17 मई, 1749| मृत्यु: 26 जनवरी, 1823
■■■■

You may also like...