देश में आने वाली कुल जॉब वैकेंसी में करीब 14% में सीधे तौर पर एआई स्किल की मांग की जा रही है और यह रफ्तार लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि एआई से जुड़े कोर्स की बाढ़ आ गई है। मगर नैसकॉम और इंडीड की संयुक्त रीस्किलिंग व टेक हायरिंग रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट में चल रहे करीब 70% कोर्स सिर्फ ‘धोखा’ दे रहे हैं।
दरअसल, कंपनियों के पास 4 साल की डिग्री का इंतजार करने का समय नहीं है, इसलिए उन्हें तुरंत हायर कर रही हैं जो 3-6 महीने के फास्टट्रैक कोर्स के जरिए इन विशिष्ट भूमिकाओं के लिए तैयार होकर आ रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स यह चेतावनी भी देती हैं कि सिर्फ सर्टिफिकेट बेचने वाले फर्जी बूटकैंप्स से बचें। बाजार केवल उसी फास्ट-ट्रैक कोर्स को तवज्जो दे रहा है, जिसके अंत में छात्र के पास 3 से 4 लाइव, डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो मौजूद हो।
आखिर कौन-से कोर्स करें?… कहां से करना चाहिए ?
1. प्रीमियम इंस्टीट्यूशनल कोर्सेज: IITs (खड़गपुर, मद्रास) के ये प्रोग्राम कोडिंग और आर्किटेक्चर सिखाते हैं।
समयवधि: 6-11 महीने, फीस: ₹84,000 से ₹20 लाख प्लेटफॉर्म: टैलेंटस्प्रिंट, एमिरिट और फ्यूचर्स।
2. ग्लोबल टेक क्रेडेंशियल्स: गूगल, डब्ल्यूएस और एज्योर के ये टूल्स-आधारित कोर्स वैश्विक स्तर पर मान्य हैं।
3. नॉन-कोडिंग व बिजनेस ट्रैक्स: एआई प्रोडक्ट मैनेजर जैसे कोर्स बिना कोडिंग के बिजनेस उपयोग सिखाते हैं।
अवधि: 1-3 महीने, फीस: ₹15,000 से ₹10 लाख।
प्लेटफॉर्म: अपग्रेड व उडेमी इसके लिए बेहतर विकल्प हैं।
शुरू यहां से करें… किसी महंगे या भारी-भरकम कोडिंग कोर्स में सीधे पैसा और समय लगाने की जल्दबाजी न करें। पहले ‘एआई साक्षरता’ और ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ को मजबूत करें…
सबसे पहला कोर्स जो अभी से शुरू होना चाहिए-
• कोर्स का नाम: ‘AI for Everyone’ (एंड्रू एनजी)
कहां उपलब्ध: Coursera (फ्री है, अगर सर्टिफिकेट चाहिए तो ही पैसे लगते हैं। इसमें सर्टिफिकेट लेना ज्यादा जरूरी नहीं है)
‘चैटजीपीटी’ सिखाने वाले कोर्स की प्रासंगिकता 6 महीने भी नहीं रहेगी। एआई खुद ये काम आसान बना देगा।
कोर प्रिंसिपल्स (दीर्घकालिक): डेटा लिटरेसी, एथिकल एआई, प्रॉब्लम फ्रेमिंग और एआई सिस्टम डायरेक्शन जैसे बुनियादी सिद्धांत सिखाने वाले कोर्स लंबे समय (3-5 साल+) तक प्रासंगिक रहेंगे।
1. शॉर्ट-टर्म कोर्सेज जॉब के लिए काफी हैं?
बिल्कुल नहीं। बाजार उन्हें पुरस्कृत करता है, जिसके पास पारंपरिक डिग्री के बुनियादी आधार के साथ-साथ व्यावहारिक एआई की समझ और लाइव प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो हो।
2. 100% जॉब गारंटी’ के दावे सही हैं? ऐसे दावों में न्यूनतम वेतन (अक्सर ₹3-4 लाख रु. सालाना), अनिवार्य उपस्थिति और रीलोकेशन जैसी कड़ी शर्तें छिपी होती हैं। कई कोर्सेज में पुराना पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है।
3. क्या एआई स्किल्स जानने वालों को वेतन में कोई विशेष लाभ मिल रहा है? हां, बाजार में एआई स्किल्स की भारी डिमांड है। डेटा के अनुसार, जिन नौकरियों में एआई कौशल की मांग की जाती है, वहां मिलने वाला औसत वेतन प्रीमियम पिछले वर्ष के 25% से बढ़कर अब सीधे 56% हो चुका है।
4. जेनेरेटिव एआई, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps में सैलरी का क्या ट्रेंड है?
इन आधुनिक क्षेत्रों में असली प्रीमियम स्किल्स और लाइव प्रोजेक्ट को मिलता है। बाजार में जेनेरेटिव एआई, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps की भूमिकाएं मिड-लेवल पर लगभग ₹18-35 लाख सालाना पैकेज दे रहीं।
5. कौन-सी जॉब ज्यादा प्रभावित हो रही है?
अनुमानों के मुताबिक, एआई शुरुआती स्तर की भूमिकाओं को 20 से 25% तक कम कर रहा है। एंट्री लेवल की नियुक्तियों में महीने-दर-महीने 23% और साल-दर-साल 44% की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें सबसे ज्यादा असर रूटीन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बेसिक कस्टमर सपोर्ट और जूनियर-कोडिंग जैसे कामों पर पड़ रहा है। आईएमएफ के अनुसार, भारत के 26% कार्यबल पर जनरेटिव एआई का प्रभाव पड़ रहा है, जिसमें से 12% पर सीधे नौकरी जाने का खतरा है। जून 2026 में भारत की टेक हायरिंग 28 महीने के निचले स्तर पर आ गई।
6. इंटरव्यू का तरीका कैसे बदल गया?
अब कोडिंग टेस्ट नहीं होते हैं। समस्या को समझने, निर्णय लेने की क्षमता व सही प्रॉम्प्ट देने की योग्यता देखते हैं।