पियरे क्यूरी की रिसर्च ने ही खोले थे परमाणु विज्ञान के रास्ते
फ्रांसीसी वैज्ञानिक पियरे क्यूरी की रिसर्च ने ही खोले थे परमाणु विज्ञान के रास्ते
पियरे क्यूरी एक महान फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी थे, जिन्होंने आधुनिक विज्ञान, विशेषकर रेडियोधर्मिता व परमाणु अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अपनी पत्नी मैरी क्यूरी के साथ मिलकर किए गए शोध कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
पियरे क्यूरी का जन्म 15 मई 1859 को पेरिस (फ्रांस) में हुआ था। उनके पिता एक चिकित्सक थे। यही वजह थी कि उन्हें बचपन से ही घर में पढ़ाई-लिखाई का और वैज्ञानिक वातावरण मिला। खास बात यह है कि कम उम्र से ही पियरे की गणित व भौतिकी विषयों में गहरी रुचि थी और विषय के प्रति अपने ज्ञान से वे सभी को आश्चर्य चकित कर देते थे। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पेरिस विश्वविद्यालय (सोरबोन) से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं अध्यापन कार्य भी किया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पत्नी मैरी क्यूरी के साथ मिलकर इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किए। दोनों ने मिलकर पोलोनियम व रेडियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों की खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आधुनिक उपकरणों में हैं उन्हीं के सिद्धांत
रेडियोधर्मिता के अतिरिक्त, पियरे क्यूरी ने पायजोइलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने अपने भाई जैकस क्यूरी के साथ मिलकर यह सिद्ध किया कि कुछ क्रिस्टलों पर दबाव डालने से विद्युत उत्पन्न होती है। यह सिद्धांत आज भी कई आधुनिक उपकरणों में उपयोग किया जाता है। उनकी खोजों ने यह सिद्ध किया कि परमाणु के भीतर भी ऊर्जा का विशाल भंडार होता है।
मैरी से हुई दोस्ती फिर दोस्ती बदली रिश्ते में
मारिया स्कोलोवस्का (मैरी) से पियरे का परिचय उनके मित्र, भौतिक विज्ञानी जोजेफ ने कराया था। पियरे ने मारिया को अपनी प्रयोगशाला में छात्रा के रूप में शामिल किया। मारिया, पियरे का साथ देने लगीं। धीरे-धीरे वे मारिया को अपनी प्रेरणा मानने लगे। मारिया ने उनके प्रारंभिक विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, लेकिन अंततः 26 जुलाई 1895 को दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।
1906 में क्यूरी सड़क दुर्घटना का शिकार हुए और दुनिया को कहा अलविदा
पियरे का जीवन सादा और शोध-केंद्रित था। वे प्रसिद्धि से दूर रहकर अपने कार्य में लगे रहते थे। 19 अप्रैल 1906 को पेरिस में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी असामयिक मृत्यु विज्ञान जगत के लिए बड़ी क्षति थी। आज भी उनकी प्रयोगशाला की नोटबुक्स विशेष सीसे के डिब्बों में सुरक्षित रखी जाती हैं। उन्हें देखने वाले लोगों को सुरक्षात्मक कपड़े पहनने पड़ते हैं। इन वस्तुओं में से अधिकांश बिब्लियोथेक नेशनल दी फ्रांस में संरक्षित हैं।
1878
में पियरे क्यूरी ने सोरबोन के विज्ञान संकाय से भौतिकी की ‘लाइसेंस’ (डिग्री) प्राप्त की।
1882
में प्रयोगशाला में डेमोस्ट्रेटर के रूप में कार्य किया। फिर वे ESPCI पेरिस के संकाय में शामिल हुए।
1903
में उन्हें पत्नी मैरी व वैज्ञानिक हेनरी को संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
चुंबकत्व पर शोध
1895 में पियरे क्यूरी को सोरबोन में डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्रदान की गई थी और फिर बाद में उन्हें भौतिकी का प्रोफेसर नियुक्त किया गया। डॉक्टरेट के लिए प्रस्तुत उनकी शोध सामग्री चुंबकत्व पर आधारित थी।
परमाणु ऊर्जा को मिली दिशा
रेडियोधर्मिता पर उनके महत्वपूर्ण शोध के लिए पियरे उनकी पत्नी मैरी व साथी वैज्ञानिक हेनरी को 1903 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। क्यूरी दंपती नोबेल जीतने वाले पहले विवाहित जोड़े के रूप में जाने गए। पियरे की खोजों ने परमाणु ऊर्जा, चिकित्सा (विशेषकर कैंसर के उपचार) आधुनिक भौतिकी के विकास में विशेष भूमिका निभाई। उनकी वैज्ञानिक सोच ने आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुसंधान के नए मार्ग प्रशस्त किए।
क्यूरी का नियम
1900 में वे विज्ञान संकाय में प्रोफेसर बने। उन्होंने चुंबकत्व के क्षेत्र में ‘क्यूरी का नियम’ दिया, जो तापमान व चुंबकीय गुणों के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।
जन्म : 15 मई 1859 | मृत्यु : 19 अप्रैल 1906












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