10 साल में जम्मू-कश्मीर के 150 से ज्यादा उम्मीदवार लोक सेवा परीक्षा में चयनित
इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ
वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे से घर के इरफान अहमद लोन दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा। सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूरी करना वाले बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भीआईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है।
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यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। हर साल औसतन 10- 15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जेएंडके से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं।
प्रेरणाः कई युवा टॉप 10 में आए दो दशक पहले यूपीएससी की चयनसूची में जम्मू-कश्मीर लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 साल के आतंक के दौर में सिर्फ चार आईएएस और आईपीएस ही निकले। 2010 में शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीर के पहले उम्मीदवार बने। 2016 में अतहर आमिर ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की। कई युवा टॉप 10 में अपना स्थान बनाने में सफल रहे।
पूर्व पुलिस अधिकारी करते हैं मदद-कुछ वर्षों में, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी न केवल श्रीनगर बल्कि छोटे कस्बों में भी छात्रों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बन गई है। बढ़ती मांग को देखते हुए कोचिंग सेंटरों का विस्तार हो रहा है। कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। पूर्व आईजीपी बसंत रथ जम्मू -कश्मीर, लद्दाख के सिविल सेवा उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग दे रहे हैं। ■■■■