नई प्रवेश नीति : 8वीं तो पास कर ली, 13 साल का नहीं होने पर विद्यार्थियों को 9वीं में नहीं मिल रहा एडमिशन

उच्च न्यायालय का रुख : हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले में टिप्पणी की थी कि केवल आयु सीमा के आधार पर शिक्षा के मौलिक अधिकार को नहीं रोका जा सकता। यदि बच्चा असाधारण रूप से मेधावी है, तो कानूनी आधार पर भी राहत मिल सकती।

कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय की गई है। इस आधार पर छात्र को 9वीं तक पहुंचते-पहुंचते अधिकतम 14 वर्ष का होना चाहिए, लेकिन कई मामलों में छात्रों की उम्र इससे अधिक या कम हो रही है, जिससे तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि इस बार छात्रों को राहत मिलती है या फिर नियमों की सख्ती के बीच कई बच्चों का भविष्य अधर में लटकता है।

दिल्ली सरकार ने स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र 6 वर्ष तय करने का फैसला किया है। यह नियम सत्र 2026-27 से दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में लागू होगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत किए जा रहे शैक्षणिक ढांचे में सुधार का हिस्सा है। शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर के अनुसार, अब फाउंडेशनल स्टेज (यानी नर्सरी से पहली तक) की उम्र तय की गई है। स्कूल प्रमुख चाहें तो प्रवेश में उम्र की सीमा में एक महीने की छूट दे सकते हैं। नया नियम सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा। लोअर केजी और अपर केजी कक्षाएं 2027-28 से शुरू होंगी। 2025-26 के छात्र (नर्सरी, केजी और क्लास 1 के) मौजूदा संरचना के अनुसार अगली कक्षा में प्रोमोट किए जाएंगे।

पुराने छात्रों को मिलेगी छूटः जिन छात्रों के पास मान्यता प्राप्त स्कूल का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट व मार्कशीट होगी, उन्हें उम्र सीमा के नए नियमों से छूट मिलेगी। वे सीधे अगली कक्षा में प्रवेश पा सकेंगे। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे माता-पिता को नए नियमों की जानकारी दें। प्रवेश और छात्र प्रगति में नई उम्र सीमा का सख्ती से पालन करें। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनईपी 2020 के अनुसार 3 साल का फाउंडेशनल स्टेज (बालवाटिका) और 6 वर्ष की उम्र में क्लास 1 की शुरुआत बच्चों की सीखने की क्षमता के अनुरूप है। इससे बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले मजबूत प्रारंभिक आधार मिलेगा।
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