नया पैटर्न… सीबीएसई ने की सख्त मार्किंग , मार्क्स इन्फ्लेशन पर भी रोक लगाई ,टॉपर कल्चर पर ब्रेक…
कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक चर्चा जोरों पर थी, वह रह की जब सब टाॅपर बन रहे हैं , कोई फेल होता ही नहीं तो अब ‘नेता’ कोन बनेगा ? CBSE ने यह चिंता दूर करने की शुरुआत की है । पहली बार 12th की काॅपियाँ online जाँची गई, इससे जाँच कर्ता शिक्षक प्रारदर्शी था,वह अधिक अंक दे कर अपने को सुरक्षित रखने की मंशा पूरी नहीं कर पाया और परिणाम सबके सामने है । टाॅपरों की बाढ़ जांच कर्ता शिक्षक की वजह थी ।
●नया पैटर्न… सीबीएसई ने 7 साल की सबसे सख्त मार्किंग की, मार्क्स इन्फ्लेशन पर भी रोक लगाई
टॉपर कल्चर पर ब्रेक… 95%+ वाले 1% से भी कम: 95% से अधिक अंक वाले छात्रों का प्रतिशत पहली बार गिरकर 1 से नीचे गया। ये सिर्फ 0.97% है। 2020 में ये आंकड़ा करीब 3% था। इसी तरह, 90% से अधिक अंक वालों की संख्या भी सबसे कम रही। 2020 में करीब 13% छात्रों के 90% से अधिक अंक थे। इस बार ये आंकड़ा सिर्फ 5% है।
• हर 11वें छात्र को सप्लीमेंट्री…
8 साल का रिकॉर्ड: 2026 में 1,63,800 छात्र सप्लीमेंट्री श्रेणी में आए, जो कुल परीक्षार्थियों का 9.26% है। यानी हर 11वें परीक्षार्थी को सप्लीमेंट्री आई है। यह प्रतिशत पिछले 8 वर्षों का सर्वाधिक है। 2025 में 7.63% छात्र इस श्रेणी में थे।
• मूल्यांकन…अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित रहा
रिजल्ट के आधार पर माना जा रहा है कि सीबीएसई ने इस बार 7 साल का सबसे सख्त मूल्यांकन किया। मार्क्स इन्फ्लेशन यानी अस्वाभाविक रूप से अंक बढ़ाने की प्रवृत्ति रोकी। बोर्ड के अनुसार, ओएम से मूल्यांकन अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित रहा है। हाई स्कोरर्स में कमी और सप्लीमेंट्री में बढ़ोत्तरी को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है।
• सरकारी स्कूल छाए… प्राइवेट से 5.33% बेहतर: केंद्रीय विद्यालयों ने 98.55 पास प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। जवाहर नवोदय विद्यालय 98.47% के साथ दूसरे स्थान पर रहे। सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 89.55%, एडेड का 86.07% और प्राइवेट का 84.22% रहा।















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