ऑन स्क्रीन मूल्यांकन का असर; 12वीं के रिजल्ट से डरे छात्र, सीबीएसई से एमपी बोर्ड में जा रहे
सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) की बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद एक नया ट्रेंड सामने आया है। इस साल के नतीजों को देखकर बाकी छात्र भी स्कोर को लेकर चिंतित हैं। ऑन-स्क्रीन इवैल्यूएशन में स्कोर बिगड़ने का डर इतना है कि वे अब अपना बोर्ड बदलने लगे है। 12वीं के छात्रों के साथ ही 11वीं कक्षा के कई छात्र इस सत्र में सीबीएसई से एमपी बोर्ड की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
इसी बार से सीबीएसई ने बारहवीं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया है। इसमें कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल रूप में जांचा जाता है। इस प्रक्रिया में परीक्षक हर एक शब्द और लाइन को जूम करके बहुत बारीकी से पढ़ते हैं, जिससे छोटी से छोटी स्पेलिंग मिस्टेक या फॉर्मूले की गलती भी तुरंत पकड़ में आ जाती है। पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहने के कारण पारंपरिक तरीके (हाथ से कॉपी जांचने) में जो थोड़ी रियायत मिल जाती थी, वह डिजिटल मार्किंग में पूरी तरह खत्म हो गई है। इसी सख्ती के कारण इस बार कई ऐसे विद्यार्थियों का परफार्मेंस भी बिगड़ा है जो दसवीं तक टॉप करते रहे हैं।
दरअसल, जिन छात्रों को 90 प्रतिशत से ऊपर अंक मिलने की उम्मीद थी, उनमें से ज्यादातर बमुश्किल 80-85 प्रतिशत ही स्कोर कर पाए।
एमपी बोर्ड की ओर बढ़ रहा रुझान
सीबीएसई की सख्त मार्किंग पॉलिसी और कड़े होते एग्जाम पैटर्न से बचने के लिए कई छात्र अब सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। वे स्कूलों से टीसी लेकर एमपी बोर्ड के स्कूलों में एडमिशन ले रहे हैं। दरअसल, मैथ्स-साइंस विषय लेने वाले ज्यादातर छात्र स्कूल की पढ़ाई के साथ जेईई और नीट की भी तैयारी करते हैं। इसी साल कई बच्चों ने जेईई में तो अच्छा स्कोर किया लेकिन, बारहवीं में पिछड़ गए। इन छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि एमपी बोर्ड का मार्किंग पैटर्न तुलनात्मक रूप से छात्रों के लिए अनुकूल है। इससे वे बिना दबाव के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ अपना स्कोर भी सुरक्षित कर सकते हैं।
आंसर शीट के लिए आज से होंगे आवेदन, 26 से दर्ज होगी आपत्ति
ऑन-स्क्रीन मार्किंग में रीचेकिंग की प्रक्रिया भी अब आसान और पारदर्शी हो गई है। पहले छात्रों को वेरिफिकेशन, आंसर शीट हासिल करने और रिवैल्यूएशन की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब पहले चरण में 19 से 22 मई तक छात्र अपनी डिजिटल (स्कैन) आंसरशीट के लिए आवेदन कर सकेंगे। दूसरे चरण में 26 से 29 मई के बीच वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। अगर मूल्यांकन में कोई गलती लगती है तो वे सुधार और पुनर्मूल्यांकन के लिए दावा कर सकते हैं। ■■■■
CBSE • छात्रों के विरोध के बाद बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन फीस में बड़ी कटौती की
12वीं; दोबारा कॉपी जंचवाने में एक नंबर भी बढ़ा तो पूरी फीस लौटा देंगे
1. उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी पाने के लिए 700 रु. के स्थान पर केवल 100 रुपए ही देने होंगे
2. अंकों के सत्यापन यानी फिर टोटल कराने के लिए 500 रुपए की जगह 100 रुपए ही देने होंगे
3. सवालों की दोबारा जांच कराने के लिए प्रति सवाल 25 रु. लगेंगे पिछले वर्ष तक 100 रु. लगते थे
मैथ-फिजिक्स-केमिस्ट्री जैसे विषयों में ज्यादा नंबर इसलिए कटे, क्योंकि स्टेप मार्किंग हुई है
सीबीएसई 12वीं के नतीजों में जिन छात्रों को लगता है कि उनके कम नंबर आए हैं, तो वे पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करें। बोर्ड ने छात्रों के विरोध के बाद पुनर्मूल्यांकन फीस में बड़ी कटौती की है। अब स्कैन कॉपी के लिए 700 की जगह 100 रु. ही देने होंगे। यही नहीं, प्रति सवाल दोबारा जंचवाने के लिए अब 100 की जगह 25 रु. ही लगेंगे। शिक्षा सचिव संजय कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये घोषणाएं कीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी का एक अंक भी बढ़ता है तो उसे पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए जमा फीस वापस लौटा दी जाएगी।
19 मई से 22 मई के बीच छात्र अपनी स्कैन आंसर शीट हासिल कर सकते हैं। यदि कॉपी वेरिफाई या री-इवैल्यूएट कराना चाहें तो अगले हफ्ते में 26-29 मई के बीच ऐसा भी कर सकेंगे। संजय कुमार ने कहा कि 98,66,222 में से 13,583 कॉपियां ही ऐसी थीं, जिनकी स्कैन कॉपी ऑन स्क्रीन नहीं जांची जा सकी। संभवतः हल्की स्याही वाले पेन के इस्तेमाल से ऐसा हुआ। 9 मई के बाद इन कॉपियों को मैनुअली जांचा गया।
हल्की स्याही से स्कैनिंग में दिक्कत; विदेश में काली स्याही से लिखना अनिवार्य होता है
छात्रों को लगता है OSM की वजह से नंबर कम आए, इस पर बोर्ड ने क्या कहा?
शिक्षा सचिव संजय कुमार के अनुसार, छात्रों की यह आशंका निराधार है। बोर्ड ने ‘मार्किंग स्कीम’ में कोई बदलाव नहीं किया है। नियम वही हैं जो पिछले वर्षों में थे। अंतर सिर्फ इतना कि पहले शिक्षक कागज की कॉपी पर पेन से नंबर देते थे और इस बार कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन कॉपी देखकर की-बोर्ड/माउस से नंबर दर्ज किए गए।
इस बार क्या बड़ी चुनौतियां झेलनी पड़ीं?
भारत में इस साल 12वीं के मूल्यांकन के दौरान मुख्य रूप से चार तरह की समस्याएं देखी गईं-
– पठनीयता: कई छात्रों ने हल्की स्याही इस्तेमाल की, जिससे स्क्रीन पर अक्षर धुंधले दिखाई दिए।
– बुनियादी ढांचा: 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का बोझ होने से कई केंद्रों पर सर्वर धीमा रहा।
– शिक्षकों की प्रैक्टिस: करीब 77,000 शिक्षक इस प्रक्रिया का हिस्सा थे। सालों से कागज-कलम पर कॉपी जांचने वाले शिक्षकों के लिए घंटों स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करना अपेक्षाकृत ज्यादा थकाऊ व चुनौतीपूर्ण रहा।
– कनेक्टिविटी: दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट की अस्थिर गति ने भी काम की रफ्तार घटाई।
विदेश में ऐसी चुनौतियों का क्या हल है?
– स्टेशनरी: ब्रिटेन (GCSE) और कैम्ब्रिज जैसे बोर्ड में छात्रों को केवल काली स्याही के बॉलपॉइंट पेन के इस्तेमाल का निर्देश होता है। ये स्कैनिंग में 100% स्पष्टता सुनिश्चित करता है।
– हाइब्रिड: तकनीकी संदेह होने पर ‘अपवाद’ श्रेणी में डालकर फिर स्कैन या मैनुअल जांच। – क्लाउड सर्वर: ट्रैफिक के अनुसार सर्वर की क्षमता बढ़ जाती है, ताकि सिस्टम धीमा न हो। – दो शिक्षकों से जांच: अंकों में 5% से अधिक अंतर होने पर तीसरे विशेषज्ञ को स्थानांतरण। – कार्य क्षमता: परीक्षकों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए हर 2 घंटे में अनिवार्य ब्रेक का नियम।