मध्यप्रदेश: भर्तियों में आरक्षण • जीएडी ने पुनर्गठित व नवगठित जिलों के लिए 100 बिंदुओं का रोस्टर बनाया

सीधी भर्ती के पदों के लिए… 6 जिलों में आरक्षण रोस्टर जारी, सबसे ज्यादा छिंदवाड़ा में 73 फीसदी

राज्य सरकार ने प्रदेश के पुनर्गठित और नवगठित जिलों के लिए जिला स्तरीय सीधी भर्ती के पदों के लिए नया आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है, जिसके अनुसार सबसे ज्यादा छिंदवाड़ा जिले में भर्तियों में आरक्षण 73 प्रतिशत होगा। सरकार द्वारा यह कदम मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियमों में संशोधन के तहत उठाया है।

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के द्वारा जारी इस सर्कुलर से प्रदेश के 3 पुनर्गठित जिलों छिंदवाड़ा, सतना और रीवा तथा 3 नए बने जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा का नया जिला स्तरीय 100 बिंदुओं का रोस्टर बनाया है। इस नए रोस्टर के अनुसार जिलों में वहां की जनसंख्या की स्थिति के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत तय किया गया है।

• जिला सतना संशोधित आरक्षण का कुल प्रतिशत 68 प्रतिशत – ओबीसी 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 19 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 12 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।

• जिला रीवा संशोधित आरक्षण 66 प्रतिशत – ओबीसी 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 13 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस 10 प्रतिशत।

• जिला छिंदवाड़ा 73 प्रतिशत – अनुसूचित जनजाति 39% (जिले में सर्वाधिक), ओबीसी 14% व अनुसूचित जाति 11% व ईडब्ल्यूएस के लिए 9% आरक्षण दिया गया है।

• मैहर जिला नया बना है, आरक्षण 71% – ओबीसी के लिए 27%, अनुसूचित जाति 19% और अनुसूचित जाति 15% तथा ईडब्ल्यूएस का आरक्षण 10% होगा।

• मऊगंज नया जिला बना है, जहां आरक्षण 69 प्रतिशत होगा – ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 18 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 14 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

• पांढुर्णा नया जिला बना है, जहां आरक्षण 72 प्रतिशत होगा – ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 25 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 10 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस का आरक्षण 10 प्रतिशत होगा।

नए जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा के गठन व पुराने जिलों की सीमाओं में बदलाव के कारण वहां जिला स्तरीय स्थानीय सरकारी नौकरियों (तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सीधी भर्ती के पद) में आरक्षण का पुराना ढांचा व्यावहारिक नहीं रह गया था। इस नए रोस्टर से इन जिलों में प्रशासनिक नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा। जिला स्तरीय रोस्टर का सबसे बड़ा सिद्धांत यह होता है कि स्थानीय स्तर पर जिस वर्ग की जितनी आबादी है, उसे सरकारी नौकरियों में उतना उचित प्रतिनिधित्व मिले। यही कारण है कि जहां आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा में एसटी को 39% आरक्षण दिया गया है, वहीं विंध्य क्षेत्र के मऊगंज में SC वर्ग को 18% और सतना में 19% आरक्षण का प्रावधान किया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यह आरक्षण रोस्टर न्यायालयीन आदेशों के अधीन रहेगा।
■■●■■

You may also like...