नीट यूजी काउंसलिंग : देशभर के 824 मेडिकल कॉलेजों में ले सकते हैं प्रवेश

21 जून को होने वाली नीट परीक्षा में करीब 22+ लाख छात्र शामिल हो रहे हैं। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों को मेडिकल कॉलेज प्रवेश की असली प्रक्रिया यहीं से गुजरना होता है। सीट सिर्फ नीट स्कोर से नहीं, बल्कि रैंक, कटऑफ व काउंसलिंग के आधार पर मिलती है। इसलिए पहले से तैयारी शुरू करनी चाहिए। हर साल पेपर के कठिन स्तर के अनुसार रैंक बदलती है। 2024 में पेपर आसान था, इसलिए कटऑफ ज्यादा रही थी। वहीं 2025 में पेपर कठिन था। उस साल टॉपर का स्कोर 686 रहा और सरकारी कॉलेजों के लिए सेफ स्कोर 610 अंक माना गया। जानते हैं अब परीक्षा के बाद क्या करना चाहिए…

काउंसलिंग के लिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। इनमें 10वीं-12वीं की मार्कशीट, आधार, जन्मतिथि का प्रमाण, OBC-NCL या EWS प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) और डोमिसाइल प्रमाणपत्र शामिल हैं। सभी दस्तावेजों में नाम, माता-पिता का नाम व जन्मतिथि एक जैसी होनी चाहिए।

15% ऑल इंडिया कोटा: इसकी काउंसलिंग MCC करता है। इसमें देशभर के छात्र सरकारी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों की सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
85% स्टेट कोटा: इसकी काउंसलिंग संबंधित राज्य करता है। इसमें राज्य के डोमिसाइल उम्मीदवार शामिल होते हैं।

काउंसलिंग के दौरान कॉलेजों की पसंद (चॉइस फिलिंग) बहुत सावधानी से भरनी चाहिए। कंप्यूटर एल्गोरिदम ऊपर से नीचे तक विकल्पों को देखता है। यदि किसी महंगे निजी कॉलेज को गलती से ऊपर रख दिया गया, तो बेहतर सरकारी कॉलेज मिलने का मौका छूट सकता है।

नियमों के अनुसार छात्र अगले राउंड में फिर से हिस्सा ले सकते हैं।
• राउंड 1: पहली बार सीट अलॉटमेंट व एडमिशन का मौका।
• राउंड 2: सीट अपग्रेड या नई सीट पाने का दूसरा अवसर।
• स्ट्रे वैकेंसी व स्पेशल राउंड: जरूरत पड़ने पर बची हुई सीटों पर दाखिला इस राउंड से मिलता है।

एमसीसी काउंसलिंग में सिक्योरिटी फीस 10 हजार रुपए होती है। डीम्ड यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग में यह राशि 2 लाख रुपए तक हो सकती है। कुछ स्थितियों में दूसरे राउंड के बाद सीट छोड़ने पर यह राशि जब्त हो सकती है।

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