सीयूईटी(CUET) काउंसलिंग अगले सप्ताह से शुरू, जानें परसेंटाइल से चॉइस फिलिंग तक

सीयूईटी यूजी का रिजल्ट जारी हो चुका है। अब प्रवेश प्रक्रिया का अगला चरण काउंसलिंग है, जो अगले सप्ताह से शुरू होगी। सीयूईटी स्कोर के आधार पर 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में दाखिला मिलेगा। इनमें केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं। रिजल्ट के बाद छात्रों को दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) और अन्य विश्वविद्यालयों के पोर्टल पर अलग से रजिस्ट्रेशन करना होगा। काउंसलिंग आमतौर पर 3 से 4 राउंड में पूरी होती है। अगर शुरुआती राउंड छूट जाएं, तो कई यूनिवर्सिटियां बाद में मिड-एंट्री का मौका भी देती हैं। इसमें पेनल्टी फीस देकर केवल खाली बची सीटों के लिए आवेदन किया जा सकता है। नियमित राउंड खत्म होने के बाद स्पॉट राउंड आयोजित होता है। इस चरण में ‘नियम ज्यादा सख्त होते हैं। स्पॉट राउंड शुरू होने के बाद सीट छोड़ने पर आमतौर पर फीस रिफंड नहीं मिलता।

परीक्षा कई शिफ्टों में होने से पेपर का कठिनाई स्तर अलग होता है। नॉर्मलाइजेशन सभी को समान आधार पर लाता है। इससे कठिन शिफ्ट वालों का NTA स्कोर बढ़ सकता है। DU, BHU जैसी विवि प्रवेश के लिए यही स्कोर देखते हैं।

इसमें कॉलेज कोर्स के कॉम्बिनेशन भरते हैं। सीट अलॉटमेंट चाइस लिस्ट में ऊपर से नीचे की ओर होता है। छात्र 3 गलतियां करते हैं। सिर्फ 10-15 टॉप कॉलेज भरते हैं, जबकि 50-60 विकल्प भरने चाहिए। कम पसंदीदा कॉलेज को ऊपर रख देते हैं। मिली सीट को ‘एक्सेप्ट’ नहीं करते।

परसेंटाइलः यह वास्तविक अंक नहीं है। यह बताता है कि शिफ्ट में कितने प्रतिशत छात्रों ने कम या बराबर प्रदर्शन किया है। • NTA स्कोर: यह नॉर्मलाइज्ड स्कोर है। इसे विभिन्न शिफ्ट के अंकों में बराबरी के लिए इक्विपरसेंटाइल विधि से बनाते हैं।

कंपोजिट स्कोर: विवि सभी विषयों के अंक नहीं जोड़तीं। किसी कोर्स के लिए जरूरी विषयों के NTA स्कोर का कुल योग ही कंपोजिट स्कोर होता है। इसी के आधार पर मेरिट बनती है।

• 750+ स्कोर: DU के साउथ कैंपस, JMI, BHU के अन्य कॉलेज और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में अवसर मिल सकते हैं। • 450-700 स्कोर: DU के कई ऑफ कैंपस कॉलेज, BBAU, AUD और कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश की संभावना रहती है।

450 से कम स्कोर नए केंद्रीय विवि, राज्य विवि और निजी विवि में अच्छे विकल्प हैं।

अपग्रेड तब चुनें, जब मिली सीट रखना चाहते हैं लेकिन प्रेफरेंस लिस्ट में ऊपर वाले कॉलेज की उम्मीद भी चाहते हैं। फ्रीज तब चुनें, जब आप मिली सीट से पूरी तरह संतुष्ट हो या आपको अपनी पहली पसंद का कॉलेज मिल गया हो।

नियमित काउंसलिंग के बाद खाली बची सीटों को भरने के लिए स्पॉट राउंड होता है। इसमें अपग्रेड का विकल्प नहीं होता। स्पॉट राउंड में शामिल होते ही पुरानी अलॉटेड सीट खत्म हो जाती है। जो सीट मिलेगी, वही अंतिम होगी। इसलिए केवल उन्हीं कॉलेजों का चयन करें, जहां वास्तव में प्रवेश चाहते हैं।
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