मप्र बोर्ड पलटेगा 2017 का फैसला • बेस्ट ऑफ 5 खत्म
मप्र बोर्ड पलटेगा 2017 का फैसला • बेस्ट ऑफ 5 खत्म
अब सभी मुख्य विषय अनिवार्य : अगले साल से 10वीं में 7 और 12वीं में होंगे 6 पेपर
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल विद्यार्थियों ने गणित- विज्ञान पढ़ना ही छोड़ दिया था (माशिमं) की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव होने जा रहा है। पिछले 9 सालों से जिस ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ सिस्टम के सहारे छात्र बोर्ड परीक्षा में अधिक नंबर ला रहे थे, अब उसे समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नए पैटर्न के तहत कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को 6 की जगह 7 और 12वीं के विद्यार्थियों को 5 की जगह 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी।
मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य के अनुसार, विषयों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसे 2026-27 के सत्र से लागू करने की योजना है। हमारा उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारना है ताकि भविष्य की चुनौतियों के लिए वे तैयार हो सकें।

क्या हैं प्रस्तावित बदलाव ?
अब 6 के बजाय 7 पेपर देने होंगे। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के साथ एनएसक्यूएफ (व्यावसायिक कोर्स) अनिवार्य रूप से जुड़ जाएगा। रिजल्ट ‘बेस्ट ऑफ सिक्स’ (7 में से 6 श्रेष्ठ अंक) के आधार पर बनेगा। 12वीं अब 5 के बजाय 6 पेपर होंगे। रिजल्ट “बेस्ट ऑफ फाइव’ (6 में से 5 श्रेष्ठ अंक) के आधार पर बनेगा।
अचानक ‘बेस्ट ऑफ फाइव खत्म क्यों करना पड़ा ?
2017 में 10वीं का रिजल्ट 49.86% रह गया था, तब छात्रों को ‘राहत’ देने के लिए यह सिस्टम लाए थे। इससे पास प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन छात्रों ने गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों को पढ़ना छोड़ दिया।
रोजगार के मोर्चे पर इसका सबसे बड़ा नुकसान क्या हुआ?
• भारतीय सेना की जनरल ड्यूटी (जीडी) भर्ती का नियम है कि 10वीं के हर विषय में न्यूनतम 33% अंक होने चाहिए। एमपी बोर्ड के हजारों छात्र ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ की बदौलत गणित या अंग्रेजी में 20-25 नंबर पाकर भी पास हो गए, पर जब वे सेना भर्ती में पहुंचे तो उन्हें अयोग्य कर दिया गया । यही स्थिति डाक विभाग और आईटीआई के ट्रेड्स में भी देखी गई।
यह 7वां विषय एनएसक्यूएफ(NSQF) क्या है?
यह राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के तहत एक वोकेशनल सब्जेक्ट है। इसमें छात्र अपनी रुचि के अनुसार आईटी, ब्यूटी, एग्रीकल्चर या रिटेल जैसे हुनर चुन सकेंगे। मकसद यह है कि अगर छात्र अकादमिक विषयों में औसत है, तो भी उसके पास एक ऐसा ‘हुनर’ हो जिससे वह रोजगार पा सके।
क्या विषयों की संख्या बढ़ने से छात्रों पर बोझ नहीं बढ़ेगा?
विषयों की संख्या बढ़ी है, लेकिन बोर्ड ने ‘बेस्ट ऑफ सिक्स / फाइव’ का सुरक्षा कवच भी दिया है। यानी अगर छात्र किसी एक विषय में कमजोर भी रह जाता है, तो उसके पास बाकी विषयों के अच्छे अंकों के आधार पर रिजल्ट सुधारने का मौका होगा। हालांकि, अब वह किसी भी मुख्य विषय को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पाएगा।
कॉलेज एडमिशन और मेरिट लिस्ट पर इसका क्या असर होगा ?
अभी तक 12वीं की मेरिट 500 अंकों पर बनती थी, जो अब 600 अंकों की हो सकती है। इससे कट ऑफ लिस्ट में अधिक पारदर्शिता आएगी। साथ ही, वोकेशनल सब्जेक्ट पढ़ने वाले छात्रों को प्रोफेशनल कोर्सेज (बीबीए, बीसीएस) में प्राथमिकता मिल सकेगी।
जो छात्र अभी 10वीं-12वीं में हैं, उनके लिए क्या नियम है?
– वर्तमान सत्र (2025-26 ) के छात्रों के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी । यह बदलाव भविष्य के बैच (2026-27) के लिए प्रस्तावित है।
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