MPPSC • ADPO भर्ती परीक्षा में इंदौर में सबसे कम 50% उपस्थिति
by
Exam Guider
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November 2, 2026
MPPSC • ADPO भर्ती परीक्षा में इंदौर में सबसे कम 50% उपस्थिति
11 साल में सिर्फ दो बार वैकेंसी, 32 हजार आवेदन, परीक्षा देने सिर्फ 58 फीसदी पहुंचे
मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की एडीपीओ भर्ती परीक्षा रविवार को दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित की गई। 107 पदों के लिए हुई परीक्षा के लिए 32 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे, लेकिन परीक्षा देने सिर्फ 58 फीसदी पहुंचे। यानी 42 प्रतिशत अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। यह स्थिति तब है जब सर्वाधिक डिमांड वाली इस परीक्षा की वैकेंसी 11 साल में सिर्फ दूसरी बार दी गई।
परीक्षा के लिए इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर में सेंटर बनाए गए थे। इंदौर में सबसे कम 50 फीसदी उपस्थिति रही। जानकारों का कहना है कि पीएससी की तमाम परीक्षाओं में अभ्यर्थी आवेदन तो बड़ी संख्या में कर रहे हैं, लेकिन औसत उपस्थिति 55 से 58 फीसदी रह गई है। यह सिलसिला पिछले दो साल से चल रहा है। इसके पीछे तीन से चार अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि ओबीसी आरक्षण के कारण 13 फीसदी रिजल्ट होल्ड पर हैं। दूसरा पदों की संख्या कम होना है। तीसरा कारण रिजल्ट व इंटरव्यू की लेटलतीफी और ज्यादातर परीक्षाओं से जुड़े मामले कोर्ट में पहुंचना है। पीएससी ओएसडी डॉ. रवींद्र पंचभाई का कहना है कि परीक्षा सभी जिलों में व्यवस्थित तरीके से हुई है।
राज्य सेवा, स्टेट इंजीनियरिंग व असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के बाद इसी परीक्षा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार डिमांड व मांग पत्र के बाद भी पीएससी ने एडीपीओ की वैकेंसी 2015 के बाद जून 2021 में निकाली थी। पांच साल पहले कुल 256 पद दिए गए थे, लेकिन इस बार आई वैकेंसी में सिर्फ 107 पद दिए गए।
2021 में एडीपीओ की वैकेंसी आई थी, लेकिन उसकी चयन सूची दो साल लेट आई थी। मई-जून 2022 तक परीक्षा व रिजल्ट के साथ इंटरव्यू भी हो चुके थे, लेकिन एग्जाम ही लगभग एक साल देरी से 18 दिसंबर 2022 को हुई थी। 4 जनवरी 2023 को परिणाम जारी किया गया। इंटरव्यू एक साल बाद 2024 में हुए थे, फिर चयन सूची में अतिरिक्त समय लगा।
पीएससी पिछले एक साल से लगभग हर तीसरी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ा रहा है। एडीपीओ की इस परीक्षा की वैकेंसी के समय 17 ही पद थे, फिर बढ़ाकर 107 हुए। अब रिजल्ट से पहले कुछ और पद बढ़ाए जा सकते हैं। 2021 में जो वैकेंसी जारी हुई थी, तब शुरुआत में 92 ही पद रखे थे। उसके बाद पदों की संख्या बढ़ाकर 148 की गई थी।
परीक्षा में इस बार निगेटिव मार्किंग भी थी। पेपर भी तुलनात्मक रूप से कठिन था। ऐसे में अभ्यर्थियों को कम उपस्थिति से राहत तो मिली है, लेकिन कठिन पेपर की वजह से एवरेज अभ्यर्थियों की राह मुश्किल हो गई है। परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का असर सबसे ज्यादा दिखेगा। कुल मिलाकर पेपर सामान्य से कठिन रहा।
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