भारत में गिग वर्कर्स की संख्या ढाई करोड़ हो जाएगी कुछ ही वर्षों में ….
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Exam Guider
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July 2, 2026
साल 2029-30 तक भारत में गिग वर्कर्स की संख्या ढाई करोड़ हो जाएगी
बदलते भारत में युवाओं की कमाई और करियर का नया पैटर्न
भारत का युवा कार्यबल तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है गिग इकॉनमी। पारंपरिक नौकरियों की जगह अब छोटे-छोटे काम, ऑन डिमांड सेवाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार युवाओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। यही वजह है कि आने वाला दशक गिग वर्कर्स के नाम लिखा जा रहा है। भविष्य के कार्य पर दृष्टिकोण और सिफारिशें (नीति आयोग) रिपोर्ट बताती है कि 2020-21 में भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 7.7 मिलियन (77 लाख) थी। आने वाले समय में यह आंकड़ा 2029-30 तक बढ़कर लगभग 23.5 मिलियन (ढाई करोड़ से ज्यादा) हो जाएगा। यानी अगले दस साल में गिग वर्कफोर्स में तीन गुना से अधिक विस्तार होगा। यह संख्या देश के कुल कार्यबल का करीब 4% हिस्सा होगी, जो किसी भी तेजी से उभरते सेक्टर के लिए बड़ा संकेत है।
युवाओं की पसंद क्यों हैं गिग वर्क ?
युवा पीढ़ी स्थायी नौकरियों से ज्यादा लचीलेपन और पढ़ाई के साथ कमाई, पार्ट टाइम विकल्प और अपनी शर्तों पर काम करने का अवसर। कैब ड्राइविंग, फूड और स्वतंत्रता को तरजीह देने देने लगी है। गिग वर्क उन्हें यही मौका देता डिलीवरी, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, होम सर्विसेज और डिजिटल फ्रीलांसिंग जैसे क्षेत्रों में यह ट्रेंड सबसे ज्यादा दिख रहा है। इसके अलावा स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट्स ने इन अवसरों को हर छोटे बड़े शहर तक पहुंचा दिया है।
सुरक्षा, स्थायित्व मिले तो विकल्प नहीं आधार बन सकता है यह क्षेत्र
भारत के लिए गिग इकॉनमी केवल रोजगार का एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य का मुख्य आधार बन सकती है। यह युवाओं को स्वावलंबी बनाती है और उन्हें बदलते डिजिटल युग के अनुरूप ढालती है। मगर तभी जब साथ-साथ उन्हें सुरक्षा और स्थायित्व भी दिया जाए। नीति आयोग की रिपोर्ट यही बताती है कि आने वाला दशक गिग वर्कर्स का होगा। सवाल सिर्फ यह है कि क्या हम इस नए कार्यबल को सही ढांचे और अवसरों के साथ आगे बढ़ा पाएंगे।
हालांकि गिग इकॉनमी युवाओं को नए मौके देती है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। आय की अनिश्चितता: हर महीने स्थायी वेतन न होना, काम की उपलब्धता पर कमाई अनिश्चित।
• सामाजिक सुरक्षा का अभाव:
बीमा, पेंशन, चिकित्सा सुविधा या भुगतान छुट्टियां जैसी सुविधाएं ज्यादातर गिग वर्कर्स को नहीं मिलतीं। करियर ग्रोथ की सीमा: यह काम अनुभव और सीख तो देता है, लेकिन स्थायी करियर पथ कम स्पष्ट रहता है।
• नीतिगत बदलाव की जरूरत:
नीति आयोग की यह रिपोर्ट संकेत देती है यदि यह वर्कफोर्स इतनी तेजी से बढ़ रही है तो सरकार और कंपनियों को भी नीतिगत पहल करनी होगी। तेलंगाना जैसे राज्यों ने गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर बिल लाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी गिग वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी, दुर्घटना बीमा और ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं से जोड़ना समय की मांग है। अगर यह सुविधाएं मिलें तो इस कल्चर में और तेजी से बूम आएगा।
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