यूपीएससी की रिपोर्ट : पहले अटेंप्ट में 6.2% ही सफल हो पाते हैं, जबकी चौथे अटेंप्ट में सफलता की दर 22% है
यूपीएससी की रिपोर्ट : पहले अटेंप्ट में 6.2% ही सफल हो पाते हैं, जबकी चौथे अटेंप्ट में सफलता की दर 22% है
IAS बनने की राह कठिन…एक हजार छात्रों में चयन एक का हो पाता है
71% सफल उम्मीदवार साइंस बैकग्राउंड के रहे
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में माना जाता है। क्योंकि यहां करीब एक हजार छात्रों में से सिर्फ एक का चयन अंतिम सूची में हो पाता है। इस परीक्षा में आखिर सबसे ज्यादा सफल कौन होता है, ये समझने के लिए साल 2023-24 की सालाना रिपोर्ट के आंकड़े
खंगाले। ये रिपोर्ट पिछले दिनों ही जारी हुई है। इसके मुताबिक, चयनित उम्मीदवारों में 71% की शैक्षणिक पृष्ठभूमि साइंस है और 29% आर्ट्स कॉमर्स से हैं। पहले अटेंप्ट में 6.2% ही सफल हो पाते हैं। जबकी चौथे अटेंप्ट में सफलता की दर 22% है।
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2011 में सीसैट शामिल होने से साइंस, इंजीनियरिंग, मेडिकल का दबदबा बढ़ा
एक्सपर्ट का मानना है कि 2011 की सिविल सेवा परीक्षा में सीसैट का पेपर प्रीलिम्स में शामिल किया गया, तब से साइंस, इंजीनियरिंग और मेडिकल बैकग्राउंड के उम्मीदवारों की संख्या सफल होने वालों में तेजी से बढ़ गई। 2011 के पहले के वर्षों में ह्यूमिनिटी व साइंस बैकग्राउंड के उम्मीदवारों की विविधता का संतुलन बना हुआ था। 2011 के बाद से साइंस बैकग्राउंड के उम्मीदवारों की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है, यह ट्रेंड 2022 के नतीजों में भी बना हुआ है।
रिपोर्ट कहती है- 24 से 26 साल के उम्मीदवारों का चयन सबसे ज्यादा होता है। इस आयुवर्ग में पुरुषों की सफलता दर 27.1% और महिलाओं की 31.9% है। हालांकि चयनित 1020 उम्मीदवारों में 669 (65.6%) पुरुष और 351 (34.4%) महिलाएं हैं। चुने हुए उम्मीदवारों में 75 फीसदी (765) ग्रेजुएट हैं, जबकि 25 फीसदी (255) पोस्ट ग्रेजुएट हैं।
यदि परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के वैकल्पिक विषयों को देखें तो ह्यूमिनिटी विषयों वाले 84.1% उम्मीदवार सफल हुए हैं। इंजीनियरिंग विषय से 3.4%, मेडिकल से 2.3% और विज्ञान से केवल 10.2% उम्मीदवारों का ही चयन
हुआ है। सिविल सेवा परीक्षा के प्रीलिम्स में पहली बार में (48.2%) और मैन्स (20.9%) व इंटरव्यू (22% ) में चौथी बार प्रयास करने पर सबसे अधिक सफलता मिल रही है।


10 साल में पॉलिटिकल साइंस का क्रेज बढ़ा
एक दशक पहले की तुलना में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, हिस्ट्री, मेडिकल साइंस, जियोग्राफी विषय लेने वाले छात्रों की हिस्सेदारी घट रही है । मैथ में भी सफलता ढाई गुना बढ़ी है जबकि एंथ्रोपोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस सबसे लोकप्रिय विषय के रूप में उभरे हैं। सोशियोलॉजी का स्तर एक दशक से वैसा ही है।

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