CBSE(सीबीएसई) नियम : अब सिर्फ लिखने से नहीं, बोलने और सुनने के भी नंबर मिलेंगे…
हर बच्चे से साल में 8 बार अलग-अलग एक्टिविटी करवाना और 40 नंबरों का मूल्यांकन करना
सीबीएसई अब विद्यार्थियों की भाषा सीखने की क्षमता को सिर्फ लिखित परीक्षा से नहीं, बल्कि उनके सुनने और बोलने के हुनर (कम्युनिकेशन स्किल्स) से परखेगा। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं के लिए तीसरी भाषा (आर-3) का नया मूल्यांकन ढांचा जारी किया है। अब भाषा की पढ़ाई ओरल-फर्स्ट की अवधारणा पर होगी, यानी विद्यार्थी पहले भाषा को सुनना और बोलना सीखेंगे, उसके बाद लिखना और पढ़ना। बोर्ड ने सभी स्कूलों को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सीबीएसई की नीति को लागू करना उन स्कूलों और शिक्षकों के लिए चुनौती होगी। जिन स्कूलों में एक-एक सेक्शन में 50 से 60 विद्यार्थी हैं, वहां हर बच्चे से साल में 8 बार अलग-अलग एक्टिविटी करवाना और 40 नंबरों का मूल्यांकन करना बड़ी परीक्षा होगी। इसके लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग की भी जरूरत पड़ेगी।
ऐसे समझें… किस बैच पर कैसे लागू होगा यह नया नियम
10वीं के विद्यार्थी : इन पर नियम लागू नहीं होगा।
9वीं के विद्यार्थी : इनका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा। अगले साल जब यह बैच 10वीं में पहुंचेगा, तब भी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
7वीं-8वीं के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी
कौन सी होगी तीसरी भाषा ?
एनईपी-2020 के तहत अब कक्षा 9वीं से विद्यार्थी को तीन भाषाएं (आर1, आर2 और आर3) पढ़नी होंगी। इनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र पहली और दूसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी और हिंदी चुनता है, तो तीसरी भाषा के रूप में उसे कोई अन्य भारतीय भाषा (जैसे संस्कृत, पंजाबी, उर्दू, तमिल आदि) चुननी होगी। छात्र अपनी रुचि व विकल्पों के आधार पर चुन सकेंगे।
• अंकों का बंटवारा इस प्रकार रहेगा….
• सुनने-बोलने की क्षमता : 40 अंक • रचनात्मक लेखन : 15 अंक • एनसीईआरटी शिक्षण संसाधनों पर आधारित मूल्यांकन : 30 अंक • प्रोजेक्ट वर्क : 15 अंक
क्लासरूम एक्टिविटी
सालभर में करनी होंगी ये 8 गतिविधियां, हर एक्टिविटी के 5 अंक
• 40 अंकों के लिए स्कूलों को सालभर में एक्टिविटीज करानी होगी, जिनमें से किन्हीं 8 को चुनना होगा। इनमें मुख्य रूप से:-
• अपना परिचय देना, किसी चित्र/स्थान का वर्णन करना। • कहानी दोबारा सुनाना और अनुभव साझा करना। • डिस्कशन, वाद-विवाद (डिबेट) और रोल प्ले। • किसी विषय पर मौखिक प्रस्तुति (प्रजेंटेशन) देना। • प्रोजेक्ट में सजावट पर नंबर नहीं मिलेंगे। बल्कि विद्यार्थियों ने कितनी सही जानकारी जुटाई इसपर मिलेंगे। ■■□■■