इस इंडस्ट्री का मार्केट साइज 126 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, दिन-पर-दिन इसका बाजार बढ़ता जा रहा है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ से बारहवीं कर युवा बना सकते हैं सोलर इंजीनियरिंग में शानदार करियर
दुनिया में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। इसकी मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में सोलर एनर्जी एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरा है। सोलर एनर्जी इंडस्ट्री का दिन प्रतिदिन तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए इस सेक्टर में काफी संभावनाएं उभर रही हैं जिससे इस इंडस्ट्री में भी नौकरियों के नए अवसर बढ़ते जा रहे हैं। इसी में से एक है सोलर इंजीनियरिंग।
सबसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों में से एक
सोलर इंजीनियरिंग सौर ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं की गहनता से अध्ययन करता है। इसमें सोलर एनर्जी टेक्नोलॉजी और सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन, फोटोवोल्टिक और सोलर थर्मल संबंधित मुद्दे भी शामिल होते हैं। सोलर इंजीनियरिंग, मुख्य रूप से सूर्य से प्राप्त नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने से संबंधित है। सोलर इंजीनियरिंग से जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक दोहन में भी कमी आएगी। ऊर्जा की कम खपत होगी और संसाधनों में बढ़ोतरी होगी। सोलर इंजीनियरिंग ने पिछले एक दशक में तेजी से विकास देखा है और अब यह इंजीनियरिंग में सबसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों में से एक बन गया है।
बारहवीं में साइंस विषय होना जरूरी
सोलर इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ विषयों के साथ 60 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसके बाद छात्र मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री ले सकते हैं। जो सोलर इंजीनियर के रूप में काम करना चाहते हैं वो केमिस्ट्री, कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियरिंग या इससे संबंधित विषयों में भी विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं।
बीटेक की डिग्री जरूरी
मैकेनिकल तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री के लिए इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होना पड़ता है। आईआईटी तथा एनआईटी में एडमिशन के लिए छात्रों का जेईई पास करना जरूरी है। जेईई एग्जाम दो चरणों में होता है- जेईई मेन तथा जेईई एडवांस।
ये स्किल होना आवश्यक
सोलर इंजीनियरिंग कार्य को करने के लिए कई तरह के टेक्निकल और सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता होती है। सोलर इंजीनियरिंग स्किल डेवलप करने और उन्हें अपने रिज्यूमे में दर्शाने से आपको अपनी पसंद की जॉब पोजीशन सिक्योर करने में मदद मिल सकती है। एक सौर ऊर्जा प्रणाली इंजीनियर के रूप में आपको सौर ऊर्जा प्रणालियों के तकनीकी पहलुओं की ठोस समझ होनी चाहिए। इसमें सौर पैनलों, नवीनतम फोटोवोल्टिक तकनीक, बैटरी भंडारण और सरणी डिजाइन को समझना शामिल है। आपको सौर ऊर्जा प्रणालियों को डिजाइन और विश्लेषण करने के लिए उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर से भी परिचित होना चाहिए। साथ ही इंजीनियरिंग कोड और मानकों का भी ज्ञान होना चाहिए। तकनीकी ज्ञान के अलावा आपके पास एक्सीलेंट प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल भी होना चाहिए।
शुरू कर सकते हैं अपना स्टार्टअप
भारत में सोलर पैनल, फ्रेम्स, इनवर्टर, सोलर लाइट्स और सोलर गैजेट्स आदि जैसे सोलर एनर्जी प्रोडक्शन संबंधित प्रोडक्ट्स के निर्माण के क्षेत्र में 150 से अधिक उद्योग हैं। सोलर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स पूरे भारत में इन इकाइयों में अच्छी नौकरियां प्राप्त कर सकते हैं। एंटरप्रेन्योरशिप स्किल्स रखने वाले अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विकल्प चुन सकते हैं। सोलर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स जो फील्ड वर्क में रुचि रखते हैं, इंस्टॉलर के रूप में काम कर सकते हैं।
लीक से हटकर सोचना होगा
करियर की शुरुआत में उम्मीदवार को 6 लाख से लेकर 15 लाख रुपए का पैकेज मिलता है। सरकारी क्षेत्र की तुलना में निजी क्षेत्र का वेतन पैकेज ज्यादा है। अनुभव और पद के अनुसार सैलरी ऑफर की जाती है। इस फील्ड में अनुभवी युवा महीने में डेढ़-दो लाख रुपए कमा लेते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता जाता है नौकरी के अवसर भी बढ़ते जाते हैं। साथ ही आय के स्रोत में भी बढ़ोतरी होती है। ■■●■■